सरकार की वादाखिलाफी को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे 6 गांवों के लोग

जमीन अधिग्रहण मामले में समान मुआवजे की मांग को लेकर दिल्ली जयपुर हाईवे स्थित नखडौला गांव में अनि?
– फोटो : Gurgaon
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ग्रामीणों का आरोप है कि साल 2004 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने एचएसआईआईडीसी के माध्यम से उनकी जमीन औद्योगिक इस्तेमाल के नाम पर कौड़ियों के भाव खरीदी। अब उसका इस्तेमाल रिहायशी क्षेत्र में तब्दील कर करोड़ों की कमाई कर रही है। तत्कालीन चौटाला सरकार ने भूमि अधिग्रहण एक्ट 17बी के तहत औद्योगिक इस्तेमाल के लिए 956 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। ग्रामीणों ने कहा कि तत्कालीन प्रदेश सरकार ने अधिगृहीत भूमि पर सेक्शन 4 व 6 नोटिस लगाकर भूमि अधिग्रहण के आदेश जारी कर दिए।
छह महीने बाद सेक्शन 9 के लगने के बाद 70-80 प्रतिशत ग्रामीणों ने 12 लाख प्रति एकड़ के रेट से पहली किस्त का मुआवजा उठा लिया। जबकि शेष 20-25 प्रतिशत ग्रामीणों ने मुआवजा नहीं उठाया। सरकार के फैसले के खिलाफ लोग कोर्ट गए तथा कोर्ट ने सरकार को 51 लाख प्रति एकड़ के रेट से मुआवजा देने के निर्देश दिए लेकिन सरकार ने 48 लाख प्रति एकड का मुआवजा देने की घोषणा की। इसी बीच सरकार द्वारा वर्ष 2014 में नया भूमि अधिग्रहण बिल लागू कर दिया गया जिसके अन्तर्गत वर्ष 2017 में शेष 20-25 प्रतिशत ग्रामीणों को जिन्होने मुआवजा नहीं उठाया था 4.27 करोड़ प्रति एकड़ के रेट से मुआवजा दिया गया।
‘सरकार ने किया मास्टर प्लान में बदलाव’
मानेसर। सरकार मास्टर प्लान में बदलाव कर औद्योगिक क्षेत्र के लिए अधिगृहीत जमीन को रिहायशी में तबदील कर करोड़ो का मुनाफा कमा रही है। अधिग्रहण के दौरान भी सरकार द्वारा घोषित औद्योगिक क्षेत्र में 150 एकड जमीन प्राइवेट बिल्डरों द्वारा खरीदी गई जो जांच का विषय है। ग्रामीणों का आरोप है जिन किसानों ने सरकार की बात मानकर मुआवजा उठाया उनका क्या दोष है। ग्रामीणों ने सरकार से मांग करते हुए कहा है प्रदेश सरकार तत्कालीन सरकार द्वारा की गई भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया की सीबीआई से जांच करवाते करवाए तथा सभी ग्रामीणों को नए भूमि अधिग्रहण बिल के अनुसार एकसमान मुआवजा दे तथा जैसा की तत्कालीन सरकार ने वादा किया था उसे पूरा करते हुए हर परिवार के एक सदस्य को नौकरी तथा ग्रामीणों को प्रति एकड़ भूमि के एवज में 500 गज का प्लॉट देने की घोषणा करें।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2004 में जब भूमि अधिग्रहण किया गया था तब सरकार ने अपने वादे को पूरा नहीं किया। सरकार ने न ही उद्योग लगाएं और न ही हमारे बच्चों को नौकरी देने के अपने वादे को पूरा किया बल्कि अधिग्रहण का भय दिखाकर हमसे हमारी जमीन भी छीन ली। आज 17 साल बीत चुके है। मौका कब्जा ग्रामीणों के पास है। जमीन पर लोगों ने अपने घर बनाए हुए है ऐसे में सरकार जबरन कब्जा लेकर हमारे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करना चाहती है। ये हम हरगिज नहीं होने देंगे। धरना स्थल पर देशराज ठेकेदार, जयपाल सिंह, राजसिंह, लाल सिंह प्रधान, वेद प्रकाश, रतिराम सूबेदार, आजाद सिंह, ओमप्रकाश यादव, सूर्यदेव नंबरदार, रवि नंबरदार, महावीर सिंह, लक्ष्मण सरपंच, रवि यादव पूर्व सरपंच, विजयपाल, कृष्ण कुमार आदि सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।
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