जब अपनों ने बनाई दूरी तो समझी लावारिश शवों की मजबूरी

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गुरुग्राम। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में जब चारों तरफ त्राहिमाम की स्थिति थी, रिश्तों की दीवारें दरक रही थीं और लोग स्वजनों से ही दूरी बना रहे थे, वो दौर भी किसी के लिए समाज में कुछ बेहतर करने के लिए प्रेरणा दे रहा था। समाजसेवी रितुराज इन्हीं में शामिल हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन से एक कदम आगे बढ़ते हुए लावारिस शवों के अंत्येष्टि की जिम्मेदारी संभाली और सिर्फ कोरोना की दूसरी लहर मेें ही 250 से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार कर दिया।
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इनमें से अधिकांश शव तो ऐसे थे, जिनके अपने या तो विदेश में थे या फिर संक्रमण के डर से जान-बूझकर आगे नहीं आए। तब से शुरू यह सिलसिला अब तक जारी है। रितुराज अब तक करीब 300 से ज्यादा लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करा चुके हैं। इस बारे में पूछने पर रितुराज ने बताया कि संक्रमण की दूसरी लहर में सेक्टर-22 में एक बुजुर्ग की मौत हुई तो शव का अंतिम संस्कार करने वाला कोई नहीं था। शव काफी देर तक ऐसे ही पड़ा रहा तो उन तक भी यह खबर पहुंची। इसके बाद वह मौके पर पहुंचे और बुजुर्ग के शव का अंतिम संस्कार कराया।
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जब पुत्र ने बनाई पिता के शव से दूरी:

इसी तरह अशोक विहार से भी एक मामला सामने आया जब संक्रमण के डर से पुत्र ने ही पिता के शव से दूरी बना ली थी। इसके बाद ही रितुराज ने अंजाम से बेपरवाह होकर संक्रमण से मरने वालों के शवों को मोक्षधाम तक पहुंचाने का फैसला किया। रितुराज के मुताबिक शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए सबसे ज्यादा समस्या यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल, मणिपुर समेत अन्य राज्यों से आए प्रवासियों के सामने आती है। उन्हें जल्द कहीं से कोई उम्मीद नहीं मिल पाती। उनकी मदद करने के लिए वह तैयार रहते हैं। इसी तरह पिछले दिनों सेक्टर-22 में तीन बुजुर्ग खत्म हुए, जिनकी वहीं पर अंत्येष्टि कराई।

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